Jamshedji Tata: बुरी तरह फेल होने के बाद बंद करनी पड़ी थी टाटा ग्रुप की पहली कंपनी, जमशेदजी टाटा के साथ हुई थी साजिश

Tata Group: टाटा ग्रुप के जनक जमशेदजी टाटा ने अंग्रेजों को चुनौती देने के लिए इस कंपनी को शुरू किया था. मगर, उन्हें अंग्रेजी सरकार का विरोध झेलना पड़ा. कई भारतीय कारोबारियों ने भी उनका साथ नहीं दिया.

Tata Group: टाटा ग्रुप आज नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाला कारोबारी समूह है. टाटा ग्रुप ने अपनी यात्रा के दौरान कई इतिहास भी रचे हैं. ग्रुप की कंपनियां आज पूरी दुनिया में अपना कारोबार जमा चुकी हैं. मगर, इस ग्रुप की शुरुआत एक बड़ी असफलता से हुई थी. टाटा ग्रुप के जनक माने जाने वाले जमशेदजी टाटा (Jamshedji Tata) को अपनी पहली कंपनी बंद करनी पड़ी थी. इस कंपनी का नाम टाटा शिपिंग लाइन (Tata Shipping Line) था.

जमशेदजी टाटा के ऊपर लिखी गई किताब से हुआ खुलासा

टाटा ग्रुप के दो पुराने कर्मचारियों आर गोपालकृष्णन (R Gopalakrishnan) और हरीश भट्ट (Harish Bhat) द्वारा जमशेदजी टाटा के ऊपर लिखी गई किताब (Jamsetji Tata – Powerful Learnings For Corporate Success) में यह रोचक जानकारी सामने आई है. उन्होंने लिखा है कि जमशेदजी टाटा कठिन निर्णय लेने से कभी पीछे नहीं हटते थे. वह घाटे में बिजनेस न चलाकर नई संभावनाएं तलाशने में विश्वास रखते थे. टाटा शिपिंग लाइन को बंद करना भी ऐसा ही निर्णय था. यह टाटा नाम से शुरू की गई पहली कंपनी थी.

इंग्लिश पीएंडओ को टक्कर देने के लिए टाटा शिपिंग लाइन को शुरू किया

जमशेदजी टाटा ने इंग्लिश पीएंडओ (English P.&O.) की टक्कर में टाटा शिपिंग लाइन को शुरू किया था. इंग्लिश पीएंडओ का 1880 और 1890 में दबदबा था. इसे तत्कालीन ब्रिटिश भारतीय सरकार का समर्थन भी हासिल था. यह भारतीय कारोबारियों से ज्यादा पैसा वसूलती थी. वहीं, ब्रिटिश और यहूदी कंपनियों को राहत देती थी. इसका असर जमशेदजी टाटा के टेक्सटाइल बिजनेस पर पड़ रहा था. ऐसे में वह जापान गए और वहां की सबसे बड़ी शिपिंग लाइन निपॉन यूसेन काईशा (Nippon Yusen Kaisha) से समझौता कर लिया.

टाटा शिपिंग लाइन के खिलाफ अफवाहें फैलाई गईं और घटा दिए रेट

इसके बाद उन्होंने एनी बैरो (Annie Barrow) नाम के ब्रिटिश शिप को 1050 पाउंड प्रति महीने के किराए पर ले लिया. यह टाटा शिपिंग लाइन का पहला शिप बना. इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने लिंडीजफर्ने (Lindisfarne) नाम के शिप को भी अपने साथ जोड़ लिया. उन्हें उम्मीद थी कि अब टेक्सटाइल इंडस्ट्री को प्रति टन 19 रुपये के बजाय 12 रुपये चार्ज देना पड़ेगा. मगर, इंग्लिश पीएंडओ ने उन्हें बड़ा झटका देते हुए रेट 1.8 रुपये प्रति टन कर दिए. साथ ही टाटा के शिप का इस्तेमाल न करने वाले कुछ मर्चेंट को फ्री शिपिंग का लालच भी दिया गया. लिंडीजफर्ने के खराब शिप होने की अफवाह भी फैलाई गई.

भारतीय कारोबारियों ने भी नहीं दिया जमशेदजी टाटा का साथ

इसके चलते जमशेदजी टाटा से भारतीय मर्चेंट दूरी बनाने लगे. जमशेदजी ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर टाटा शिपिंग लाइन बंद हुई तो उन्हें आगे जाकर बहुत ज्यादा रेट देने पड़ेंगे. उन्हें इस शिपिंग लाइन के चलते 1 लाख रुपये से भी ज्यादा का घाटा हो गया. इसके साथ ही टाटा शिपिंग लाइन इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए बंद हो गई. इसके अलावा उनके द्वारा शुरू की गई एम्प्रेस मिल्स (Empress Mills), स्वदेशी मिल्स (Svadeshi Mills), अहमदाबाद एडवांस मिल्स (Ahmedabad Advance Mills), टाटा स्टील (Tata Steel) और टाटा पावर (Tata Power) ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं. बस वह टाटा लाइन को सफल नहीं कर पाए.

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